Wednesday, 24 November 2010

2जी स्पेक्ट्रम देश का सबसे बड़ा घोटाला

दैनिक जागरण के अनुसार 
नई दिल्ली 2जी स्पेक्ट्रम मामले में सरकार को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। बुधवार को भी सुप्रीमकोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल जारी रखे। कोर्ट ने न सिर्फ इसे सबसे बड़ा घोटाला कहा बल्कि सीएजी की रिपोर्ट में उठाये गये सवालों पर भी सरकार को घेरा। वहीं दूसरी ओर राजा के खिलाफ मंजूरी लटकाने की सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पर बहस पूरी हो गयी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। स्पेक्ट्रम घोटाले में सुनवाई के मामले में यह पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है। बुधवार को सुनवाई सुब्रह्मण्यम स्वामी की अर्जी से शुरू हुई। एटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने कहा, स्वामी ने केवल पत्र लिखा था। अभियोजन की मंजूरी के लिए याचिका नहीं दी थी। ऐसे में मंजूरी का सवाल ही नहीं उठता। उनकी दलील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व ए.के.गांगुली की पीठ ने कहा, अगर ऐसा था तो सक्षम अथारिटी को उसे बेकार या व्यर्थ कह कर खारिज कर देना चाहिए था। पीठ ने पीएमओ की ओर से दाखिल हलफनामे का संदर्भ देते कहा, स्वामी के पत्र को प्रधानमंत्री ने गंभीरता से लिया था। वहीं दूसरी ओर वाहनवती ने सरकार के पास लंबित मंजूरी के कुल मामलों की सूची मांगे जाने पर कोर्ट से एक सप्ताह का समय मांग लिया। उन्होंने कहा, हर विभाग की अलग सूची है उन्हें उसकी जांच करनी होगी। पीठ ने उनसे केंद्र सरकार के साथ सार्वजनिक उपक्रम के मामलों की भी सूची देने को कहा है। सीबीआई जांच की निगरानी की मांग कर रहे एक गैर सरकारी संगठन के वकील प्रशांत भूषण ने सीबीआई व सीवीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध सूची कोर्ट में पेश की। जांच की निगरानी पर बहस के दौरान पीठ ने कहा, अगर इस घोटाले की व्यापकता को देखा जाए तो इसके आगे बाकी सभी घोटाले बौने हैं। नीतिगत मामलों में सरकार के दखल को लेकर सीएजी के अधिकार पर पीठ ने कहा, सीएजी ने सरकार की किसी नीति में दखल नहीं दिया है। उसने सिर्फ इंगित किया है कि कैसे अंतिम क्षणों में नियम बदले गये, कुछ विशेष लोगों को आवंटन के लिए चुना गया। ये नीतिगत मामला नहीं है। बहस कल भी जारी रहेगी।

खास खबर से

2जी स्पेक्ट्रम से चर्चा में आईं नीरा का बयान दर्ज

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को यहां 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले से चर्चा में आईं नीरा राडिया का बयान दर्ज किया। निदेशालय ने कहा है कि उनसे आगे भी पूछताछ की जा सकती है। ईडी के उप निदेशक प्रभाकांत ने पत्रकारों को बताया, ""हमने उनका बयान रिकार्ड किया है। उन्होंने कुछ दस्तावेज जमा करने का वादा किया है।"" अधिकारी ने कहा, ""जरूरत प़डने पर हम उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाएंगे।"" राडिया बुधवार सुबह 10.30 बजे प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय पहुंचीं। सूत्रों ने बताया कि राडिया से अवैध सम्पत्ति रोकथाम अधिनियम के उल्लंघन और वर्ष 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में दूरसंचार कम्पनियों के लिए उनकी कम्पनी द्वारा निभाई गई कथित भूमिका के संबंध में पूछताछ की। राडिया की तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा, कुछ पत्रकारों और उद्योगपतियों से बातचीत के ऑडियो टेप सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक ये ऑडियो टेप 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में दायर की गई जनहित याचिका के साथ सबूत के तौर पर पेश किए गए हंै। 16 नवम्बर को संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से देश को अरबों रूपये के राज्स्व का नुकसान हुआ है। उल्लेखनीय है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन विवाद में राजा ने गत 15 नवंबर को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।


अमर उजाला ने लिखा-
टूजी स्पेक्ट्रम के आगे सभी घोटाले मामूली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को झाड़ लगाते हुए कहा कि टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के सामने अन्य सभी घोटाले मामूली हो गए हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस समय की, जब केंद्र की ओर से मामले की निगरानी न किए जाने और याचिकाकर्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी के इस संबंध में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र को शिकायत नहीं माने जाने का तर्क दिया गया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस जीएस सिंघवी व एके गांगुली ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए स्वामी की याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया। स्वामी ने घोटाला मामले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ केस चलाने की अनुमति देने के आवेदन पर प्रधानमंत्री को निर्देश देने की मांग अदालत से की है। बेंच ने अटॉर्नी जनरल (एजी)जीई वाहनवती से कहा कि वह कई सरकारी विभागों में सक्षम प्राधिकरणों के सामने मंजूरी के लिए लंबित उन मामलों का ब्यौरा एक सप्ताह में अदालत में पेश करें।

स्वामी की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा
बेंच ने वाहनवती से कहा कि प्रधानमंत्री ने पत्र को हल्के में नहीं लिया था, जाहिर है कि उन्होंने इस पर विचार किया था। उसने यह टिप्पणी उस समय की जब एजी ने स्वामी की दलील को ठुकराते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सिर्फ पत्र भेजा था और उस पर शिकायत के तौर पर विचार नहीं किया गया। बेंच ने कहा कि आपकी ओर से पेश लिखित अनुरोध में यह कभी नहीं कहा गया कि याचिकाकर्ता ने समुचित शिकायत नहीं की। इस पर अटॉर्नी ने कहा कि हलफनामे में यही तथ्य दिए गए हैं, लेकिन इस तर्क से वह अदालत को सहमत नहीं कर सके। बेंच ने कहा कि आपके अनुसार यह शिकायत नहीं, बल्कि एक पत्र था। लेकिन जो भी था, उसे खोलने के बाद अनुमति देने वाले अधिकारी को यह बात कहनी चाहिए थी कि पत्र समुचित नहीं है। यदि स्वामी का पत्र शिकायत के तौर पर नहीं था तो आपको कहना चाहिए था कि वे आखिर शिकायत क्यों दर्ज कर रहे है जब अदालत इसे संज्ञान में नहीं ले सकती। तब अटॉर्नी ने माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि यह तर्क लिखित अनुरोध में नहीं था।

कोर्ट को मिला ‘इस्तेमाल किए’ जाने का पत्र
टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने खुलासा किया है कि उसे एक पत्र मिला है जिसमें लिखा है कि मामले में अदालत की बेंच का इस्तेमाल किया जा रहा है। जस्टिस जीएस सिंघवी और एके गांगुली की बेंच ने पहले कहा कि पत्र गुमनाम है, लेकिन बाद में कहा कि इसे किसी दक्षिण भारतीय शख्स ने लिखा है। बाद में सूत्रों ने बताया कि इस पत्र पर हस्ताक्षर और पता भी लिखा है। बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा, ‘हमारे पास गुमनाम पत्र आया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि हमारा इस्तेमाल किया जा रहा है। पत्र को कार्यालय की रिपोर्ट में लगा दिया गया है। पत्र की विषयवस्तु अब कार्यालय रपट का हिस्सा है।’

हिंदुस्तान के फरमान-
सभी घोटालों पर भारी पड़ा 2जी घोटालाः कोर्ट
केंद्र की इन दलीलों को खारिज करते हुए कि टू जी स्पेक्ट्रम मामले की उसे निगरानी नहीं करनी चाहिए और प्रधानमंत्री को सुब्रहमण्यम स्वामी द्वारा लिखे गए पत्र को शिकायत नहीं मानना चाहिए, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस घोटाले ने अन्य सभी घोटालों को शर्मसार कर दिया है।
न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले में अभियोग चलाने की अनुमति देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निर्देश दिए जाने के संबंध में स्वामी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कुछ तीखी टिप्पणियां कीं।
जब वाहनवती ने बार-बार जोर दिया कि स्वामी की याचिका सिर्फ पत्र के रूप में थी और उसे शिकायत नहीं माना जा सकता है तो पीठ ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इसे हल्के में नहीं लिया। निश्चित तौर पर वह चिंतित थे। पीठ ने कहा कि आपके लिखित जवाब में कभी नहीं कहा गया कि याचिकाकर्ता ने उचित शिकायत नहीं दाखिल की। हमें अटार्नी जनरल को सूक्ष्म अंतर बताने की जरूरत नहीं है।
पीठ ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से दायर हलफनामे में इस तरह की दलील कभी नहीं दी गई।


नीरा राडिया से ईडी के अधिकारियों ने की पूछताछ

2जी स्पेक्ट्रम मामले से चर्चा में आईं नीरा राडिया से बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने पूछताछ की।
राडिया बुधवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय पहुंचीं। इससे पहले भी उन्हें सम्मन जारी किया गया था लेकिन अस्वस्थता का हवाला देकर वह पेश नहीं हुईं थीं।
राडिया से अवैध सम्पत्ति रोकथाम अधिनियम के उल्लंघन और वर्ष 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में दूरसंचार कम्पनियों के लिए उनकी कम्पनी द्वारा निभाई गई कथित भूमिका के संबंध में पूछताछ की।
इस मामले से राडिया की तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा, कुछ पत्रकारों और उद्योगपतियों से बातचीत के ऑडियो टेप सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक ये ऑडियो टेप 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में दायर की गई जनहित याचिका के साथ सबूत के तौर पर पेश किए गए हैं।
16 नवम्बर को संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से देश को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।



No comments:

Post a Comment