Thursday, 18 November 2010

अमर उजाला की नजर में स्पेक्ट्रम घोटाला

स्पेक्ट्रम मामले में सरकार के पास बचे दो दिन
उच्चतम न्यायालय ने 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में आज सरकार से शनिवार तक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने जब यह कहा कि वह इस मामले में तमाम दस्तावेज न्यायालय के समक्ष रखने की स्थिति में हैं, तब न्यायाधीश जी एस सिंघवी और न्यायाधीश ए के गांगुली की पीठ ने सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए शनिवार तक का समय दिया।

मंगलवार को होगी अगली सुनवाई
न्यायालय जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें द्रमुक नेता ए राजा के खिलाफ मुकदमे पर प्रधानमंत्री को मंजूरी देने के लिए निर्देशित करने की मांग की गई थी। ए राजा ने इस घोटाले के सिलसिले में दूरसंचार मंत्री के पद से रविवार को इस्तीफा दे दिया है। सॉलीसिटर जनरल ने न्यायालय के समक्ष कहा कि वह सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कर सकते हैं। न्यायालय ने स्वामी से यह भी कहा कि वह यदि कोई हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं तो सोमवार तक कर सकते हैं। पीठ अब इस मामले पर अगली सुनवाई मंगलवार को करेगी.

विरोधी सांसदों ने बरपाया हंगामा, संसद स्थगित
राज्यसभा को दिन भर के लिए और लोकसभा को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। विपक्षी पार्टियों के सांसदों के भारी शोर-शराबे और विरोध के कारण राज्यसभा और लोकसभा को स्थगित करना पड़ा। विपक्षी पार्टियां 2-जी स्पेक्ट्रम और भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य मामलों की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराए जाने को अड़ी हुई हैं। राज्यसभा में 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले सहित भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों की जांच के लिये संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग पर विपक्ष के अड़े रहने के कारण आज भी गतिरोध कायम रहा और भारी हंगामे के कारण बैठक को प्रश्नकाल में ही पूरे दिन के लिये स्थगित कर दिया गया।

सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध कायम
बैठक शुरू होते ही उपसभापति के. रहमान खान ने 15 नवंबर को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर क्षेत्र में पांच मंजिला इमारत ढह जाने के हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को पूरे सदन की ओर से श्रद्धांजलि दी। सदस्यों ने दिवंगत लोगों के सम्मान में कुछ क्षण का मौन रखा। इसके बाद जैसे ही उप सभापति ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा, सदन में भाजपा और अन्नाद्रमुक सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच के लिये संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन करने की मांग पर अड़े भाजपा सहित राजग और अन्नाद्रमुक सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के निकट आ गये। उपसभापति ने सदस्यों से शांत रहने की अपील की कि लेकिन हंगामा जारी रहा।

जेपीसी गठित करने की मांग तेज
इसी मुद्दे पर वाम दल और तेदेपा के सदस्य भी अपने स्थानों पर खड़े होकर जेपीसी की मांग का समर्थन कर रहे थे। इसके विरोध में कांग्रेस सदस्यों ने प्रश्नकाल चलने देने तथा कर्नाटक के अवैध खनन के मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री बी. एस येदियुरप्पा के इस्तीफे की मांग उठाई। इस हंगामे के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी राज्यसभा में मौजूद थे। हंगामा थमते न देख उपसभापति खान ने बैठक पूरे दिन के लिये स्थगित कर दी। गौरतलब है कि जेपीसी के गठन के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध अब भी कायम है। संसद के शीतकालीन सत्र के शुरू होने के बाद एक भी दिन राज्यसभा में प्रश्नकाल नहीं चल पाया है। विपक्ष की 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मुद्दे पर जेपीसी के गठन की मांग के बीच ए. राजा को दूरसंचार मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, जबकि इस घोटाला मामले में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार, राजा ने 2-जी फ्रीक्वेंसी आवंटन के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय की सिफारिशों की अनदेखी की। इसी बीच, इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा कार्रवाई करने में विलंब किये जाने संबंधी उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी के बाद विपक्ष के साथ-साथ वाम दलों ने भी सरकार और प्रधानमंत्री पर दबाव बढ़ाते हुए जेपीसी गठित करने की मांग तेज कर दी है।

कर्नाटक सरकार को बर्खास्त करने की मांग
भाजपा, अन्नाद्रमुक समेत अन्य विपक्षी दलों के टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला मामले एवं राष्ट्रमंडल खेल आयोजन में अनियमितता की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने और कांग्रेस सदस्यों के कर्नाटक सरकार को बर्खास्त करने की मांग पर भारी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही आज 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले पांच दिन इन्हीं मुद्दों पर लोकसभा की कार्यवाही बाधित रही थी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा, अन्नाद्रमुक, बिजद, शिवसेना, जद यू समेत विपक्षी दल और सपा सदस्य उक्त कथित घोटालों की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग के समर्थन में नारेबाजी करते हुए अगली पंक्तियों के समीप आ गए। विपक्षी दलों ने ‘वी वांट जेपीसी’ का नारा लगाना शुरू कर दिया। इस बीच, सत्तारूढ़ कांग्रेस के कुछ सदस्य भी कर्नाटक सरकार को बर्खास्त करने की मांग करते हुए अगली पंक्तियों के पास आ गए। कांग्रेस सदस्य अपने हाथ में पर्चा लिये हुए थे जिसमें भूमि आवंटन मामले में भाजपा शासित कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को बर्खास्त करने की मांग की गई थी। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार का सदस्यों को अपनी सीट पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने के आग्रह का कोई असर नहीं पड़ा।

जेपीसी की मांग बेमानीः चिदंबरम
दोनों सदनों की बैठक स्थगित होने के तुरंत बाद गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि जेपीसी की मांग पूरी तरह बेमानी है। भाजपा को चाहिए कि वह सदन चलने दे। वहीं, भाजपा ने साफ कर दिया है कि जेपीसी की मांग माने जाने तक विपक्ष संसद नहीं चलने देगा।
चिदंबरम ने कहा कि कैग रिपोर्ट संसद की पीएसी ( लोकलेखा समिति) को भेजी जाएगी जिसमें सभी दलों का प्रतिनिधित्व है। गृह मंत्री ने कहा, पीएसी क्या है ? इसके अध्यक्ष विपक्ष के नेता हैं। वास्तव में सभी राजनीतिक दलों का इसमें प्रतिनिधित्व है। उन्होंने साथ ही कहा कि पीएसी को मामले की पड़ताल करने दें। पीएसी में कैग रिपोर्ट पर व्यापकता में विचार विमर्श किया जाएगा। उधर, पीएसी के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने इस मामले में जेपीसी की विपक्ष की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सभी मांगें अर्थपूर्ण हैं। कुछ भी बेमानी नहीं है।

पीएम के बयान और जेपीसी की मांग ठुकरायी
दूरसंचार मंत्री ए राजा के इस्तीफे पर प्रधानमंत्री के बयान और 2 जी स्पैक्ट्रम मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित किए जाने की विपक्ष की मांग को ठुकराते हुए सरकार ने पलटवार के अंदाज में आज सवाल किया कि केन्द्र में सत्ता में रहते विपक्ष ने कितनी बार ऐसा किया था। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा,‘‘प्रधानमंत्री को संसद में बयान क्यों देना चाहिए। सदन में बयान देना, मंत्री का विशेषाधिकार है। यदि राजा ऐसा चाहते हैं तो वह खुद ऐसा बयान दे सकते हैं।’’

भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए वित्त मंत्री ने विपक्ष की मांग पर हैरानी जतायी कि क्या तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उस समय संसद में बयान दिया था जब जार्ज फनार्डिंस को तहलका खुलासे के बाद रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। लोकसभा में सदन के नेता मुखर्जी ने कहा कि ‘‘जेपीसी की मांग पूरी तरह अस्वीकार्य है। अपने छह साल के शासन में उन्होंने ( राजग ) तहलका समेत कितने मामलों में जेपीसी गठित की।’’ उन्होंने कहा कि लोक लेखा समिति ( पीएसी ) के रूप में एक ‘स्थायी’ जेपीसी पहले से ही है। मुखर्जी ने कहा कि विपक्षी सदस्य ( मुरली मनोहर जोशी ) की अध्यक्षता वाली पीएसी 2 जी स्पैक्ट्रम मुद्दे पर कैग रिपोर्ट का गहरायी से अध्ययन करेगी।

हम सभी संस्थानों को नष्ट कर रहे हैं
जेपीसी के गठन की मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा की बैठकें विपक्ष के हंगामे के चलते दिनभर के लिए स्थगित होने के तुरंत बाद मुखर्जी ने अफसोस जताते हुए कहा,‘‘हम सभी संस्थानों को नष्ट कर रहे हैं।’’ उन्होंने तल्ख लहजे में कहा,‘‘व्यवस्था कैसे काम करेगी? वे ( भाजपा ) भी देश के विभिन्न राज्यों में सरकारें चला रहे हैं। यह सब बेहद दुखद है।’’ इससे पूर्व, गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जेपीसी की मांग एकदम बेमानी है।’’ उन्होंने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट लोक लेखा समिति को भेजी जायेगी। लोक लेखा समिति का अध्यक्ष विपक्ष का कोई नेता होता है और इसमें सभी दलों का प्रतिनिधित्व है। चिदम्बरम ने कहा कि लोक लेखा समिति को इस मामले को देखने दीजिये। पीएसी में कैग की रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा होगी। टूजी स्पेक्ट्रम मामले की जेपीसी से जांच कराने की मांग को लेकर संसद की पिछली चार बैठकों में कोई कामकाज नहीं हो सका है। संचार मंत्री ए राजा ने कल रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

कैग रिपोर्ट कल संसद में पेश होने की संभावना
टू-जी स्पैक्ट्रम मामले में कल कैग की रिपोर्ट संसद में पेश किए जाने की संभावना है. इसके साथ ही विपक्ष की इस मसले पर संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की मांग भी जोर पकड़ सकती है। भाजपा तथा उसके सहयोगी संगठन और वाम दल, अन्नाद्रमुक, सपा तथा राजद मामले की जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग पर अड़े हुए हैं। माना जाता है कि कैग रिपोर्ट में दूरसंचार मंत्रालय पर 2 जी स्पैक्ट्रम का कम मूल्य लगाए जाने का आरोप है जिससे सरकार को 76, 700 करोड़ रूपये के राजस्व का नुकसान हुआ। एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि सरकार आज एक नोटिस दे रही है कि वह कैग रिपोर्ट सदन के पटल पर रखना चाहती है।

यह नोटिस वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा दिया जाएगा। कैग रिपोर्ट पर संसद में चर्चा कराए जाने के मसले पर संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल पहले ही कह चुके हैं कि सरकार स्पैक्ट्रम मामले समेत सभी मसलों पर चर्चा को तैयार है लेकिन इसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध करने का फैसला कैग रिपोर्ट के पीएसी या किसी अन्य समिति के पास जाने के बाद ही लिया जाएगा। कैग पहले ही सरकार को रिपोर्ट सौंप चुका है। विपक्ष इस मामले में जहां जेपीसी की मांग पर अड़ा है तो वहीं सरकार साफ कर चुकी है कि इसकी जरूरत नहीं है। सरकार इस मसले पर प्रधानमंत्री द्वारा बयान दिए जाने की संभावना से यह कहते हुए पहले ही इनकार कर चुकी है कि अभी ऐसी कोई बात नहीं है कि प्रधानमंत्री बयान दें।

गतिरोध समाप्ति के लिए कल सर्वदलीय बैठक
ए राजा के इस्तीफे के बावजूद 2 जी स्पैक्ट्रम मामले में संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की मांग पर विपक्ष के लगातार चार बैठकों से स ंसदीय कार्यवाही ठप किए जाने के बीच सरकार ने गतिरोध समाप्ति के लिए कल सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलायी है। लोकसभा में सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने कल दोपहर के भोजन पर भाजपा तथा वाम दलों समेत विभिन्न दलों के दो दर्जन से अधिक नेताओं को आमंत्रित किया है। सूत्रों ने बताया कि सभी प्रमुख दलों के नेताओं को दोपहर के भोजन पर आमंत्रित किया गया है जिसके दौरान सरकार उनसे संसद में सुचारू तरीके से कामकाज चलाए जाने की अपील की जाएगी। संसद का शीतकालीन सत्र नौ नवंबर को शुरू होने के बाद से केवल पहले दिन को छोड़कर लोकसभा और राज्यसभा में न तो प्रश्नकाल हो सका है और न ही कोई विशेष विधायी कामकाज ही संपन्न हो पाया है।

हालांकि संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने आज 2 जी स्पैक्ट्रम मामले की जांच के लिए जेपीसी गठित किए जाने की संभावना से यह कहते हुए इनकार किया कि इससे कोई मकसद हल नहीं होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि मामले को लोक लेखा समिति पर छोड़ दिया जाना चाहिए जो कैग रिपोर्ट की पड़ताल करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि पीएसी या कोई भी संसदीय समिति जेपीसी की तरह ही किसी को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है। उन्होंने यह टिप्पणी यह पूछे जाने पर की कि कुछ विपक्षी सदस्यों का यह विचार है कि वे जेपीसी की मांग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह मामले की पड़ताल के लिए किसी को भी तलब कर सकती है।

राजा की करतूतों से निशाने पर पीएम
ईद की छुट्टी के बाद बृहस्पतिवार को संसद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सीधे-सीधे विपक्ष के निशाने पर होंगे। टूजी स्पेक्ट्रम मामले में पूर्व संचार मंत्री ए राजा के कारनामों पर पीएमओ की चुप्पी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद इस मामले में सरकार ही नहीं प्रधानमंत्री पर दबाव बढ़ गया है। संसद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री से सवालों की बौछार कर विपक्ष ने अपने इस सियासी इरादे को जाहिर तो किया ही है। साथ ही इसी बहाने जेपीसी जांच की अपनी मांग को और तेज कर दिया है। वहीं, यूपीए सरकार फिलहाल विपक्ष की मांग के आगे हथियार डालने का संकेत नहीं दे रही। इस मामले पर गतिरोध कायम रहने के मद्देनजर बृहस्पतिवार को भी संसद में भारी हंगामा होने के पूरे आसार हैं।
हालांकि सियासी और राजनैतिक मोर्चे पर जूझ रही सरकार इस संकट से निकलने का रास्ता तलाशने की कोशिशों में अभी भी जुटी हुई है।
विपक्ष से जहां अनौपचारिक चैनलों के जरिए वार्ता का सुलह फार्मूला निकालने की कोशिशें हो रही हैं। वहीं कानूनी तौर पर बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने सॉलिसिटर जनरल को बुलाकर उनसे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मद्देनजर पूरी स्थिति की जानकारी ली व अगले कदम को लेकर चर्चा भी की। पीएमओ यह जानने की कोशिश भी कर रहा है कि आखिर चूक कहां हो गई। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय अटार्नी जनरल से खफा है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय पर उंगली उठाई है। इससे प्रधानमंत्री विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं तो सरकार पर भ्रष्टाचार के दोषियों को कवच प्रदान करने का सवाल उठ गया है। कहा जा रहा है कि इतने बड़े मामले को लेकर अटार्नी जनरल को पूरी स्थिति की जानकारी व तैयारी होनी चाहिए थी।
इधर, भाजपा और लेफ्ट समेत विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट भी टिप्पणी के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में गए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस मामले पर प्रधानमंत्री से जवाब देने की मांग की है। दिल्ली में माकपा पोलित ब्यूरो ने भी एक बयान जारी कर कमोबेश यही मांग दोहरा दी।

विपक्ष अब बृहस्पतिवार को इसी मांग पर संसद को गरमाएगा। इस चौतरफा दबाव के बावजूद सरकार की तरफ से जेपीसी जांच मानने को लेकर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं। जबकि विपक्ष अब भी अपनी मांग पर अड़ा है। जबकि कांग्रेस ने मामले को सरकार पर ही छोड़ दिया है। कांग्रेस मान रही है कि इस राजनैतिक संकट से सरकार ही बेहतर तरीके से निपट सकती है। सरकार जो भी कदम उठाएगी पार्टी उसका समर्थन करेगी।

बुधवार को पीएमओ ने सॉलिसिटर जनरल को बुलाकर उनसे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मद्देनजर पूरी स्थिति की जानकारी ली और अगले कदम को लेकर चर्चा भी की। पीएमओ यह जानने की कोशिश भी कर रहा है कि आखिर चूक कहां हो गई। टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सालिसिटर जनरल बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में जवाब देंगे।




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